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Big Talk!!राम मंदिर निर्माण के योजनाकारों में शामिल उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा,`गौरवशाली जिम्मेदारी मिलना परम सौभाग्य’:बोले-1600 करोड़ का बजट लेकिन इसका दुगुना होना तय है:दान में मिले कई कुंतल सोने-चांदी का निर्माण में इस्तेमाल खर्च से इतर:मंदिर पूरा बनने की Deadline तय नहीं:सिर्फ पहली मंजिल कब तक बननी है ये तय था

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रामलला की मूर्ति बाल्यकाल वाली ही लगनी थी:5 सदी पहले जब मंदिर को ध्वस्त किया गया था तब ही बचपन के राम की मूर्ति ही थी:CM पुष्कर कोई जिम्मेदारी देते हैं तो उसको निभाने में ख़ुशी होगी-पूर्व CS

Chetan Gurung

पूर्व IAS अफसर और उत्तराखंड के मुख्य सचिव और फैजाबाद मंडल के आयुक्त रहे शत्रुघ्न सिंह भी नृपेन्द्र मिश्र की अगुवाई वाली 5 सदस्यीय राम मंदिर निर्माण समिति सदस्य हैं.उन्होंने www.chetangurungg.com से बातचीत में कहा,`राम सभी के दिलों में हैं और उनके मंदिर के निर्माण में अहम योगदान के लिए जिम्मेदारी मिलना परम सौभाग्य है.मंदिर के निर्माण के लिए आधिकारिक बजट 1600 करोड़ रूपये तय था.इसका 3200 करोड़ रूपये तक जाना या इससे अधिक होना तय है.मंदिर के लिए दान दाताओं की तरफ से मिले सोने-चांदी और अन्य वस्तुएं बजट से इतर हैं.मंदिर निर्माण कब पूरा होगा, इसकी Deadline तय नहीं है.सिर्फ पहली मंजिल कब तक बन जानी है, ये तय था.ये भी साफ़ है कि राम मंदिर निर्माण का खर्च हजारों करोड़ रूपये तक जाएगा.’

Former Chief Secretary of Uttarakhand Shatrughan Singh-Member Ram Mandir Nirman samiti

भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बेहद खुश शत्रुघ्न ने कहा कि उनके बड़े भाई का नाम भी राम है और वह उनके सबसे प्रिय अनुज हैं.ये बहुत बड़ा संयोग है कि उनको अयोध्यापति राजा राम के मंदिर निर्माण का पवित्र दायित्व मिला.मंदिर निर्माण की बैठकों और कामकाज पर नजर रखने के लिए वह इसी साल कम से कम 5 बार अयोध्या जा चुके हैं.समिति में 3 पूर्व IAS-1 IPS और 1 Expert शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि समिति की जिम्मेदारी मंदिर निर्माण का कार्य तेजी से और बेहतरीन ढंग से पूरा कराना है.उसकी जवाबदेही सिर्फ राम मंदिर Trust के प्रति है.सरकार से समिति का कोई लेना-देना नहीं है.पूर्व नौकरशाह शत्रुघ्न CS के ओहदे से Retire होने के बाद देहरादून में ही बस गए हैं.वह यहाँ राजपुर स्थित Tehri House में रहते हैं.उन्होंने कहा कि उनको भी राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिए विधिवत निमंत्रण था.मजबूरीवश वह नहीं जा सके.इसका मलाल रहेगा.

शत्रुघ्न के मुताबिक मंदिर के लिए दान में खूब सोना-चांदी मिला है.लगातार मिलता जा रहा है.Trust के सचिव चम्पत राय के 8 करोड़ रुपये का एक ही दरवाजा होने पर उन्होंने कहा कि ये दरवाजे वे हैं, जो मंदिर के गर्भ गृह में लगे हैं.जो मुख्य प्रवेश द्वार हैं.सभी दरवाजे इतने करोड़ रूपये के नहीं हैं.1983 Batch के IAS ने साफ़ किया कि भगवान राम की मूर्ति बचपन वाली ही स्थापित होनी थी.जब मंदिर को ध्वस्त कर विवादित ढांचा बनाया गया था, तब भी बाल राम की प्रतिमा ही मंदिर में थी.

राम मंदिर निर्माण समिति के सदस्य के अनुसार कृष्ण और भगवान राम श्याम वर्ण के थे, इसलिए प्रतिमा श्याम वर्ण की बनाई गई.इसके लिए पहले पूरा शोध और अध्ययन किया गया.मंदिर निर्माण का प्रशासनिक और शोध कार्य समिति के पास है.शत्रुघ्न का नाता अयोध्या और राम मंदिर से किसी न किसी तरह बना रहा है.वह साल-1990 में फैजाबाद मंडल के आयुक्त रहे.अयोध्या इसी मंडल में था.

उनको PMO ने एक किस्म से तब अपना नोडल अफसर या फिर दूत भी बनाया हुआ था.वह सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों से बात करते थे.दोनों के बीच पुल का काम करते थे.राज्य के बेहद सुलझे और व्यावहारिक नौकरशाहों में शुमार किए गए शत्रुघ्न को RSS और BJP के करीब भी माना जाता रहा है.उन्होंने तीरथ सिंह रावत के CM बनने पर अपनी मुख्य सूचना आयुक्त की कुर्सी को छोड़ के उनका सलाहकार बनने का फैसला किया था.

ये बात दीगर है कि तीरथ 4 महीने बाद ही हटा दिए गए.उनके साथ ही शत्रुघ्न से भी सलाहकार की जिम्मेदारी चली गई.वह इसके बाद सिर्फ राम मंदिर निर्माण समिति के सदस्य के तौर पर प्रमुख जिम्मेदारी निभा रहे हैं.पूर्व नौकरशाह ने कहा कि उत्तराखंड में भले उनके पास अपना निजी आवास नहीं है लेकिन वह यहाँ की मिट्टी से गहराई और भावनात्मक तौर पर जुड़े हैं.मौजूदा CM पुष्कर सिंह धामी उनको कोई जिम्मेदारी देते हैं तो उसको स्वीकार कर इस पवित्र देवभूमि की सेवा करने में उनको बेहद ख़ुशी होगी.

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