अंतर्राष्ट्रीयउत्तराखंडदेशदेहरादूनयूथराजनीति

देश की सबसे बड़ी खबर!!UCC (सभी धर्म-पंथ-लिंग के लिए एक कानून) विधेयक उत्तराखंड विधानसभा में पास:CM पुष्कर की सबसे बड़ी सियासी फतह!बढ़ा रुतबा!!`X’ पर PSD Number-1 ट्रेंडिंग

खबर को सुने

वन्दे मातरम-भारत माता की जय के उद्घोषों से गूँज उठा सदन:आन्दोलनकारियों के आश्रितों को 10 फ़ीसदी क्षैतिज आरक्षण का प्रस्ताव भी पास

Chetan Gurung

CM पुष्कर सिंह धामी और BJP के सबसे बड़े संकल्प तथा हथियार सभी धर्म-पंथ-लिंग के लिए एक कानून (Uniform Civil Code) से जुड़े विधेयक को उत्तराखंड विधानसभा ने आज पास कर दिया.पूरे देश और अंतर्राष्ट्रीय जगत की नजरों को भी अपनी तरफ खींचने वाले इस विधेयक के पास होने से मुख्यमंत्री PSD का सियासी रुतबा देश और पार्टी में बहुत ऊंचा हो जाना तय है.बिल पास करने के अनुरोध से पहले PSD ने लम्बा चौड़ा वक्तव्य देने के दौरान कहा कि UCC को लागू करने का अवसर मिलना उत्तराखंड के लिए सौभाग्य की बात है.देश के अन्य राज्य भी इस दिशा में आगे बढ़ेंगे, ऐसी उम्मीद है.विधेयक पास होते ही `X’ (पूर्व में Twitter) पर PSD देश में Number-1 ट्रेंड करने लगे हैं.

CM पुष्कर सिंह धामी सदन में UCC विधेयक को पास करने का अनुरोध करते हुए

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के हर शख्स को आज गर्व की अनुभूति हो रही है.एक भारत-श्रेष्ठ भारत के लिए हमारा संकल्प था कि UCC लागू किया जाएगा. उत्तराखंड बाबा केदार-गंगा-आदि कैलाश और सैनिकों का प्रदेश है.यहाँ रहने वाले हर शख्स के लिए एक कानून का प्रस्ताव लोगों के सामने रखा था.इसमें उनका समर्थन मिला.हर चुनाव में परिपाटी थी कि एक चुनाव में एक पार्टी और दूसरे चुनाव में दूसरी पार्टी की सरकार बनती थी.इस मिथक को यहाँ के लोगों ने BJP को विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार जितवा के तोड़ा.

उन्होंने कहा कि Justice रंजना देसाई समिति ने दो उप समितियों की मदद से UCC ड्राफ्ट तैयार किया.समिति लोगों के बीच गई.उनकी राय ली.कांग्रेस समेत सभी पार्टियों को भी सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया गया.43 जनसंवाद के कार्यक्रम हुए.समिति को 2,3,29,61 सुझाव और 10 प्रतिशत परिवारों के सुझाव प्राप्त हुए.पहली बार किसी कानून बनाने के लिए इतने लोगों की राय ली गई.ये विधेयक पूरे देश के लिए मील का पत्थर साबित होगा.माँ गंगा की तरह राह दिखाएगी.संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और सुरक्षित करने का कार्य करेगी.सच तो ये है कि ये विधेयक एकता की बात करता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान पंथ निरपक्ष है.ऐसे में नागरिकों के बीच भेद को कायम नहीं रखा जा सकता. खाई को भरने का काम आज से, अभी से, यहीं से शुरू होगा. समान नागरिक संहिता विवाह, भरण-पोषण, गोद लेने, उत्तराधिकार, विवाह विच्छेद जैसे मामलों में भेदभाव न करते हुए सभी को बराबरी का अधिकार देगा। यही प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार भी है.देवभूमि समानता-सभी का सम्मान करना सिखाती है.यहां के चार धाम और कई मंदिर हमारे लिए पूजनीय है.पिरान कलियर भी हमारे लिए एक पवित्र स्थान है.“

उन्होंने कहा कि हम उस सत्य की बात कर रहे हैं जिसे संविधान के अनुच्छेद-44 में होने के बावजूद अब तक दबा कर  रखा। वही सत्य, जिसे 1985 के शाह बानो केस के बाद भी स्वीकार नहीं किया गया”CM पुष्कर ने कहा,“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों में कहा जाए तो यही समय है-सही समय है। अब समय आ गया है कि महिलाओं के साथ होने वाले अत्यचारों को रोका जाए”.

उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने इससे संबंधित विषयों को समवर्ती सूची में डाला है। इसकी मंशा ये थी कि केन्द्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी अपने राज्य के लिए समान नागरिक संहिता पर कानून बना सकें”.ताज्जुब होता है कि देश की आजादी के बाद 60 सालों से अधिक समय तक राज करने वाले दलों ने समान नागरिक संहिता को लागू करने के बारें में विचार तक नहीं किया। वे राष्ट्रनीति को भूलकर सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति करते रहे.

उन्होंने कहा,“हमारी माताओं-बहनों के इंतजार की घड़ियाँ अब समाप्त होने जा रही हैं।  उत्तराखण्ड इसका साक्षी बनने जा रहा है. इसके निर्माण के लिए इस प्रदेश की मातृशक्ति ने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था.यह विधेयक महिला सुरक्षा तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण अध्याय है”

मुख्यमंत्री ने कहा,“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तीन तलाक और धारा-370 जैसी ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने के पथ पर है.”UCC विधेयक प्रधानमंत्री मोदी की देश को विकसित, संगठित, समरस और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए किए जा रहे महान यज्ञ में प्रदेश की तरफ से एक आहूति भर है’.  

उन्होंने कहा,`हमनें संविधान के अनुच्छेद-342 के अंतर्गत वर्णित हमारी अनुसूचित जनजातियों को UCC से बाहर रखा है. ऐसा महज इसलिए किया गया कि जनजातियों और उनके रीति रिवाजों का संरक्षण किया जा सके’.“यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि विवाह केवल और केवल एक पुरुष व एक महिला के मध्य ही हो सकता है। ऐसा करके हमने समाज को एक स्पष्टता देने व देश की संस्कृति को भी बचाने का काम किया है.’

UCC में Live-in Relationship संबंधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। वयस्क पुरुष (न्यूनतम 21 वर्ष या अधिक) और वयस्क महिला (न्यूनतम 18 वर्ष या उससे अधिक की हो) ही लिव इन रिलेशनशिप में रह सकेंगे. वे पहले से विवाहित या किसी अन्य के साथ लिव इन रिलेशनशिप में नहीं होने चाहिए. कानूनन प्रतिबंधित संबंधों की श्रेणी में न आते हों. जब कुछ कर गुजरने की नीति होती है, जब राष्ट्र प्रथम होता है, तब ऐसे क़ानून बनते हैं.

CM ने अपने व्यक्तव्य के बाद UCC बिल पास करने का प्रस्ताव स्पीकर ऋतु खंडूड़ी की मंजूरी के बाद सदन में रखा.प्रस्ताव के पास होते ही सदन में ट्रेजरी बेंच में गजब का जोश दिखाई दिया.वे भारत माता की जय-वन्दे मातरम और जय श्रीराम का नारा लगाते रहे.उत्तराखंड आन्दोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 फ़ीसदी क्षैतिज आरक्षण का प्रस्ताव भी पास होते ही सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने रखा.जो पास हो गया.

_______________________________________________________________________________________________________

समान नागरिक संहिता विधेयक के कानून बनने पर समाज में बाल विवाह, बहु विवाह, तलाक जैसी सामाजिक कुरीतियों और कुप्रथाओं पर रोक लगेगी, लेकिन किसी भी धर्म की संस्कृति, मान्यता और रीति-रिवाज इस कानून से प्रभावित नहीं होंगे। बाल और महिला अधिकारों की यह कानून सुरक्षा करेगा.
*यूसीसी के अन्य जरूरी प्रावधान*

———————————————————————–
-विवाह का पंजीकरण अनिवार्य। पंजीकरण नहीं होने पर सरकारी सुविधाओं से होना पड़ सकता है वंचित।
-पति-पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह पूर्णतः प्रतिबंधित।
-सभी धर्मों में विवाह की न्यूनतम उम्र लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष निर्धारित।
-वैवाहिक दंपत्ति में यदि कोई एक व्यक्ति बिना दूसरे व्यक्ति की सहमति के अपना धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को उस व्यक्ति से तलाक लेने व गुजारा भत्ता लेने का पूरा अधिकार होगा।
-पति-पत्नी के तलाक या घरेलू झगड़े के समय 5 वर्ष तक के बच्चे की कस्टडी उसकी माता के पास ही रहेगी।
-सभी धर्मों में पति-पत्नी को तलाक लेने का समान अधिकार।
-सभी धर्म-समुदायों में सभी वर्गों के लिए बेटी-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार।
-मुस्लिम समुदाय में प्रचलित हलाला और इद्दत की प्रथा पर रोक।
-संपत्ति में अधिकार के लिए जायज और नाजायज बच्चों में कोई भेद नहीं किया गया है। नाजायज बच्चों को भी उस दंपति की जैविक संतान माना गया है।
-किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसकी संपत्ति में उसकी पत्नी व बच्चों को समान अधिकार दिया गया है। उसके माता-पिता का भी उसकी संपत्ति में समान अधिकार होगा। किसी महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के संपत्ति में अधिकार को संरक्षित किया गया ।
-लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार को उनके माता-पिता या अभिभावक को देनी होगी।
-लिव-इन के दौरान पैदा हुए बच्चों को उस युगल का जायज बच्चा ही माना जाएगा और उस बच्चे को जैविक संतान के समस्त अधिकार प्राप्त होंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button