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Real Estate-शिक्षा-Cricket-सियासत!छल-फरेब-जालसाजी की उर्वरक धरती बनी उत्तराखंड:Collaboration Projects में नौकरशाह-राजनेता-माफिया:पूर्व सरकारों ने कभी नहीं रखा वास्ता:खाद-पानी दिया:CM पुष्कर के हंटर से अब कंपकंपी:लेकिन और क्रूर होना होगा  

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The Corner View

Chetan Gurung

CM Pushkar Singh Dhami-no hesitation in Action

उत्तराखंड को राज्य का दर्जा मिले एक-दो साल भी नहीं हुए थे और इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट की डिग्री दिलाने के नाम पर प्रेमनगर कैंट से नीचे और GMS Road स्थित निजी कॉलेजों की ठगी के धंधे सामने आने लगे थे.देश के दूर-दराज के राज्यों के कुछ Students मुझसे मिलने आए और कईयों की आँखों में आंसू तक थे.उन्होंने बड़े अख़बारों के विज्ञापनों के झांसे में आ के इन कॉलेजों में मोटी फीस दे के प्रवेश लिया.बाद में मालूम चला कि उनको ठगा गया.इन कॉलेजों को न केंद्र न राज्य सरकार न ही AICTE से कोई मान्यता थी.मालिक लोग परचून की दूकान जैसे अंदाज में कॉलेज चला रहे थे.मोटा माल खींच रहे थे.कईयों को तो ये भी नहीं मालूम था कि उनका कॉलेज फर्जी है.20 साल की उम्र के लड़के-लड़कियों का पैसा और उनके जिंदगी के कीमती 2-3 साल बर्बाद हो गए थे.मैंने कस के सीरीज लिखी.सचिव (तकनीकी शिक्षा) नृप सिंह नपलच्याल, जो बाद में मुख्य सचिव और मुख्य सूचना आयुक्त भी बने, ने जम के डंडा कॉलेजों के मालिकों और पुलिस को दिया.दर्जन भर से ज्यादा मुल्जिम मालिकों को फरार होना पड़ा था.भूमिगत रहते हुए जमानत करानी पड़ी.कुछ कॉलेज हमेशा के लिए बंद हो गए.कुछ ने मान्यता ली लेकिन उनका फर्जीवाड़ा आज भी अलग और नए अंदाज में बरक़रार है.

Chetan Gurung

देहरादून में आज भी ऐसे-ऐसे कॉलेज हैं, जिनके पास जितनी बुनियादी सुविधाएँ हैं, उसमें स्कूल भी नहीं खोला जा सकता.ऐसा ही एक कॉलेज है, जो इतने Course चला रहा है कि देहरादून के ही कई बड़े और नामी निजी विश्वविद्यालयों (Graphic Era-DIT-IMS-पेट्रोलियम) के पास उससे 10 गुणा अधिक संसाधन होने के बावजूद नहीं हैं.जाहिर है कि AICTE-राज्य सरकार-उसको सबद्धता देने वाले श्रीदेव सुमन और गढ़वाल विवि-UTU के अफसरों का पूरा हाथ और साथ उसके साथ है.कुछ कॉलेज के मालिक इतने शातिर हैं कि बदनाम होने पर कॉलेज का नाम ही बदल दिया और फिर धंधे में खुल के उतर गए.जम के लूटमार मचाए हुए हैं.सरकार-विवि-AICTE को जेब में डाला हुआ है.

सरकार और विवि प्रशासन ईमानदारी से जांच और कार्रवाई करें तो इस किस्म के कॉलेजों पर ताला लगने और मालिकों के जेल जाने में कोई देर नहीं लगेगी.ये और उसके साथ पचासों कॉलेजों के मालिक समाज कल्याण विभाग की SC-ST छात्रवृत्ति घोटाले में भी बुरी तरह फंसे हुए हैं.हैरानी ये है कि इसके बावजूद वे बेधड़क दिखते हैं.धंधा बाखूबी चला रहे.युवाओं के भविष्य से वे खेल रहे.उनको लूट रहे.Golden Forest की विवादित जमीनों-नदियों पर अवैध कब्ज़ा किए हुए हैं.सुप्रीम कोर्ट के नदियों-नालों-तालाब-पोखरों पर निर्माण-कब्जों के खिलाफ से जुड़े आदेश भी उनको गैर कानूनी करतूतों से नहीं रोक पा रहे.कई तो खुल के फर्जी प्रवेश दे रहे.सीट न होने के बावजूद.श्रीदेव सुमन विवि के एक VC तक इसमें खूब बदनाम हुए और जांच झेलते हुए कुर्सी से विदा हुए.

Real Estate का धंधा पारस पत्थर बन गया है.जिस पर इसका हाथ छू जाए उसको अरबपति बनते देर नहीं लग रही.क्या छुटभैय्ये Property Dealer और क्या मोहल्ले के नेता, इस धंधे में उतरे और उत्तराखंड बनने के बाद उनकी चमचमाती गाड़ियों-बंगलों-जमीनों और भोग-विलास-ऐश्वर्य देखते ही बनता है.इस खेल में इतना पैसा है कि बड़े से बड़ा नाम और मंत्री-IAS-IPS तक माफिया के साथ गलबहियां कर मोटा माल कूटने में मस्त हो गए हैं.ये लोग साथ ही फ़ार्म हाउसों-5 Star होटलों और बंद कमरों में साथ गला तर करने से नहीं चूकते हैं.जोहड़ी गाँव में 20 बीघे जमीन के स्वामित्व में फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है.पुलिस केस में राजधानी के बेहद बड़े और संघ के करीबी समझे जाने वाले उद्योगपति का नाम सामने आना नहीं चौंकाता है.उत्तराखंड में ये अब आम होता जा रहा है.

ख़ास बात ये है कि इस शक्तिशाली उद्योगपति ने ऐसे शख्स के साथ धोखाधड़ी की जो खुद इस धंधे के उस्ताद माने जाते हैं.इस लड़ाई में सरकार-संघ और सत्तारूढ़ BJP से जुड़े कुछ बहुत बड़े नामों के भी नाम अंदरखाने उछल रहे हैं.प्रेमनगर कैंट में अमिताभ टेक्सटाइल मिल की बेशकीमती जमीन से जुड़े विवाद में केंद्र और राज्य के मंत्रियों के नाम भी माफिया के समर्थन में सामने आए.अब सुनने में आया है कि ये मामला सुलट गया है.कैसे सुलटा होगा, ये आसानी से समझा जा सकता है.आर्केडिया चाय बागान की 1128 एकड़ जमीन को भी अधिग्रहित कर फिर बेचने की साजिश का खुलासा मैंने ही स्टोरी लिख के किया और अब ये मामला भी एक बार फिर ठन्डे बस्ते में चला गया दिख रहा.बावजूद इसके ये सवाल तारी रहेगा कि Land Use से छेड़ छाड़ के बावजूद इस 20 हजार करोड़ रूपये से अधिक कीमत के भूखंड को सरकार क्यों कब्जे में नहीं ले रही!

पुष्पांजलि हाउसिंग सोसायटी से जुड़ी ओहदेदार को भी पुलिस ने धोखाधड़ी में अन्दर तो कर दिया है लेकिन ऐसे तमाम जालसाज और धोखेबाज Builders अभी जेल की सींखचों के बाहर मौज कर रहे.एक बार एक ऐसे शख्स से मेरी मुलाकात एक मंत्री ने कराई, जिसको मुख्य सचिव-गृह सचिव और DGP के स्तर पर मदद की दरकार थी.मैं हैरान था कि उस बन्दे के पास खुद की निजी सुरक्षा व्यवस्था थी.जो हथियारों से सज्जित रहते थे.खुद बड़े बदमाश लगते थे.उससे बातचीत से पता चला कि कई नौकरशाहों से उसके बेहद करीबी रिश्ते थे.कुछ के उसने बंगले बना के भी दिए थे.दरअसल वह खुद अच्छा-ख़ासा माफिया था.उसकी पश्चिमी UP के एक बड़े और नामी कुख्यात Don से जान लेने-देने के दर्जे तक ठनी हुई थी.

जमीनों के खिलाड़ियों ने खेलों को भी नहीं बख्शा.एक नामी Cricket Academy में सालों पहले Indian Team के दिग्गज Cricketer प्रदर्शनी मैच खेलने आए हुए थे.उस दिन क्रिकेट के शौक़ीन एक मुख्य सचिव से सुबह उनके दफ्तर में मेरी मुलाकात हुई.उन्होंने कहा कि उनको मैच में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया हुआ है.जाऊं न जाऊं, समझ नहीं आ रहा.मैंने कहा कि जाने में क्या हर्ज है.उन्होंने तब मुझे बताया कि क्रिकेट एकेडमी जिस जगह पर है, उसके बड़े हिस्से पर मालिक ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है.सरकार में शिकायत भी आई हुई है.उस एकेडमी का मालिक देहरादून के क्रिकेट माफिया को हिसाब-किताब में मदद करने के मामले में भी अंदरखाने की चर्चाओं के केंद्र में है.क्रिकेट ने उत्तराखंड को खेलों की दुनिया में भी देश-विदेश में बदनाम किया है.ये कहा जा सकता है.BCCI और उसके कुछ ओहदेदारों का अंधा संरक्षण-उत्तराखंड सरकार की चुप्पी इसके माफिया किस्म के कुछ ओहदेदारों को करतूतों को अंजाम देने के लिए बल दे रही, कहा जा सकता है.

देश भर में शायद ही किसी राज्य में क्रिकेट एसोसिएशन ऐसी होगी, जिसके सचिव और बाकी ओहदेदारों के खिलाफ निचली से ले के High Court तक मुकदमों की सुनवाई चल रही हो.तमाम FIR गंभीर आपराधिक मामलों में दर्ज हों.जमानत पर बाहर हों और कई मुकदमों में जमानत के लिए जद्दोजहद कर रहे हों.फरार होना पड़े.जिसके पीछे पुलिस की SoG हफ़्तों दौड़ी हो.पुलिस के संरक्षण का कमाल है कि फरारी के दौरान SoG और पुलिस मुल्जिम के खिलाफ कुछ नहीं कर पाई.क्रिकेट से ही जुड़े एक मामले में एक कथित आल इंडिया टूर्नामेंट के आयोजन में धोखाधड़ी-फर्जीवाड़ा करने के मामले में आयोजन समिति के ही Chairman मदन कोहली ने Secretary प्रेमचंद वर्मा (PC वर्मा) और Cricket Association of Uttarakhand के कोषाध्यक्ष मानस मेंगवाल समेत 8 के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया.इनमें से 6 CaU में वोटिंग अधिकार रखते हैं.खुद कोहली CaU में हैं.एसोसिएशन के ही ओमप्रकाश सूदी-संजय गुसाईं-संजय रावत-रोहित चौहान-अवनीश वर्मा-तेजिंदर सिंह रावत और कुछ अन्य ने अलग-अलग मुकदमे CaU पर ठोंके हैं.HC में केस चल रहे.भ्रष्टाचार पर HC में PIL भी CaU के खिलाफ दर्ज है.जूनियर इंडिया खेल चुके आर्य सेठी से रंगदारी मांगने-जान से मारने की धमकी का मामला भी अदालत में है.निचली अदालत में नाबालिग महिला क्रिकेटर के यौन उत्पीड़न का केस चल रहा.

CM पुष्कर सिंह धामी ने आम तौर पर क्रिकेट के जालसाजों से खुद को दूर रखा है.CaU के ओहदेदारों की पूरी कोशिश रहती है कि किसी न किसी बहाने सरकार के मुखिया को अपने मोहपाश में ले सकें.एकाध मौकों को छोड़ दें तो मुख्यमंत्री ने क्रिकेट के दागदारों से खुद को दूर ही रखा है.इस पर भी जांच हो सकती है कि बिना मुख्यमंत्री की मंजूरी के कैसे निमंत्रण पत्रों में उनका नाम छप रहा.इस पर भी सवाल उठ रहे कि जो खेल संस्था देश भर में बदनाम हो चुकी हो, उसके आयोजनों में मंत्री कैसे बार-बार चले जाते हैं.जिस टूर्नामेंट के आयोजन में फर्जीवाड़ा और मुकदमा दर्ज हुआ है, उसमें एक मंत्री ने 5 लाख रूपये देने का ऐलान भी किया और शायद भुगतान भी हो गया.सरकार में व्यवस्था होती है कि राज्यपाल-CM-मंत्री को अगर किसी आयोजन में जाना होता है या निमंत्रित किया जाता है तो पहले आयोजकों और संस्था की ख़ुफ़िया रिपोर्ट मंगाई जाती है.रिपोर्ट ख़राब और नकारात्मक हो तो वे आयोजनों में नहीं जाते हैं.न जाने ये व्यवस्था अब ख़त्म कर दी गई है या फिर मुख्य अतिथि बनने का लोभ मंत्रियों के आँख-कान बंद कर दे रहे!

अब कुछ बातें सियासत की हो जाए.BJP और Congress ने उत्तराखंड में राज किया और दोनों के मुख्यमंत्रियों ने भीतरी दगाबाजी को धक्का लगने की हद तक जा के सहा.ND तिवारी को CM रहने के दौरान कई मौकों पर हरीश रावत खेमे की तरफ से झटका मिलने वाला था.वह NDT थे.सियासत के खुद उस्ताद थे.उन्होंने राजनीतिक शत्रुओं को पस्त रखा.5 साल राज किया.फिर निकल लिए.BC खंडूड़ी में उन जैसा सियासी हालात भांपने का हुनर नहीं था.न ही डॉ रमेश पोखरियाल निशंक-हरीश रावत-त्रिवेंद्र सिंह रावत में लेशमात्र गुण NDT का था.ये ही कारण था कि CM रहने के दौरान झटका दर झटका खाने से नहीं बच पाए.5 साल राज नहीं कर पाए.राजनीति में लम्बा वक्त गुजारने के बावजूद ये कहा जा सकता है कि BCK-निशंक-हरीश-त्रिवेन्द्र के पास सियासी वातावरण-तापमान को मापने का बैरोमीटर नहीं था.पुष्कर इस मामले में उनके गुरु कहे जा सकते हैं.वह नफासत और सलीके से बहुत Smartly सियासत और सल्तनत चला रहे.

PSD अंदरूनी-बाहरी विरोधियों-शत्रुओं पर पैनी और खामोश नजर रखते हैं.हालात को जल्दी भांपने का गुर है.पार्टी और सरकार में टॉप से ले के नीचे तक मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं.सत्ता पर उनकी जबरदस्त पकड़ है और मंत्री-सचिव में ये कुव्वत नहीं है कि मनमर्जी से बिना उनकी प्रत्यक्ष-परोक्ष मंजूरी-इजाजत के कोई अहम फैसला ले सके.उत्तराखंड में सबसे सख्त और तेज फैसला करने वाला मुख्यमंत्री पुष्कर को कह सकते हैं.Land जिहाद-धर्म परिवर्तन कानून-नक़ल कानून-सामान नागरिक संहिता (UCC) और न जाने कितने बड़े और अहम सख्त फैसले उन्होंने लिए हैं.बड़े-बड़े सूरमाओं को जुर्म सामने आने पर जेल की सींखचों में भेजने का दम दिखाया.जमीनों-शिक्षा-क्रिकेट-किटी-शराब की दुनिया से जुड़े माफिया तंत्र को भी ध्वस्त कर उनको जेल भेजने का दम उन्हीं में है.नजरें इस लिए उनसे और बड़ी तथा त्वरित कार्रर्वाई की है.

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