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IAS पंवार दंपत्ति का दुर्भाग्यपूर्ण VRS:आनंदबर्द्धन के लिए Blessing in Disguise:तकदीर साथ दे तो 4 महीने में CS!

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The Corner View

Chetan Gurung

मनीषा पंवार ने देश की ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली भारतीय प्रशासनिक सेवा से VRS ले लिया.कुछ साल पहले IAS पति उमाकांत पंवार ने भी अचानक सभी को चौंकाते हुए ऐसा ही कदम तब उठाया था जब उनके पास 10 साल की सेवा बची थी.उनके कदम का तो किसी को ठोस कारण पता नहीं चला लेकिन राज्य की शीर्ष कुर्सी मुख्य सचिव (CS) बनने की दहलीज पर पहुंची मनीषा खराब स्वास्थ्य की वजह से नौकरी छोड़ने को मजबूर हुई.1992 Batch के IAS आनंदबर्द्धन के लिए ये Blessing in Disguise वाली सूरत है.दो बड़े Contender (दंपत्ति भी) के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लेने से उनका न सिर्फ CS बनना बल्कि हालात कुछ अलग किस्म के रहे तो 4 महीने में ही CS की कुर्सी पर बैठना सिर्फ वक्त की बात भर रह गई है.

Anandbarddhan (ACS)-CS in waiting!

1990 बैच की मनीषा को बेहद काबिल-कार्यकुशल नौकरशाह का दर्जा हासिल था.महज 23 साल की उम्र में IAS बन गई थीं.ये ही वह उम्र होती है जो CS की कुर्सी पर निश्चित रूप से बैठने की गारंटी देने के साथ ही तकदीर में रहा तो भारत सरकार के सचिव और Cabinet Secretary के लिए दरवाजे खोल देती है.देहरादून में सेंट थॉमस कॉलेज से स्कूली पढ़ाई करने वाली मनीषा को बतौर नौकरशाह अपनी बात मजबूती से वरिष्ठों और सरकार के सामने रखने तथा सियासतदां के आगे जल्दी न झुकने के लिए भी जाना जाता था.उनके पति उमाकांत उनसे 1 Batch जूनियर थे.2017 में उन्होंने रहस्यमय तरीके से सेवा छोड़ी थी.कहा जाता है कि देश में सिर्फ IAS ही सेवा है.बाकी सभी नौकरियां!

Chetan Gurung

मनीषा का स्वास्थ्य पिछले कुछ सालों से ख़राब था.ईलाज लगातार चल रहा है. ACS या राजस्व परिषद् के Chairman के तौर पर भी सामान्य कामकाज करना उनके लिए बहुत मुश्किल होने लगा था.दफ्तर कम ही बैठ पा रही थीं.नौकरी पर स्वास्थ्य को तरजीह देना उनका निस्संदेह एकदम सही फैसला है.वह जब देहरादून में SDM थीं, तब से उनको जानता हूँ.शायद साल 1994 का वक्फा रहा होगा, जब उनसे पहली बार मिला था.तब वह नाम के पीछे प्रसाद लिखा करती थीं.शादी नहीं हुई थीं.जिप्सी में वह DM-मंडलायुक्त-मंत्रियों की बैठकों में दिखतीं या फिर धरना-प्रदर्शनों के दौर में भीड़ को नियंत्रित करती-उनको समझाती मिलतीं.उत्तराखंड बन जाने के बाद वह DM (देहरादून) बनीं तो उनके कामकाज को याद किया जाता रहा.उन्होंने उत्तराखंड Cadre में खुद को घोल लिया था.

कामकाज में जितनी सख्त मिजाज वह बतौर प्रशासक रहीं व्यावहारिक तौर पर वह उतनी मिलनसार अफसर रहीं. सही को सही और गलत को गलत बोलने से पीछे नहीं हटीं या हिचकीं.मनीषा सेवा में बनी रहतीं तो उनको मुख्य सचिव बनने से रोकना सरकार के लिए भी मुमकिन न होता.उनकी नौकरी मार्च-2027 तक थी.ACS आनंदबर्द्धन से 3 महीने पहले ही Retire होतीं.मौजूदा CS डॉ सुखबीर सिंह संधू को जनवरी-2024 तक का Extension दिया गया है.उनको फिर सेवा विस्तार नहीं दिया जाता है तो ACS राधा रतूड़ी का CS बनना तय है.वह कुछ महीनों से कामकाज और दफ्तर में बेहद सक्रिय दिख भी रही हैं.अधिकांश बैठकें लेते और अहम मुआयना करते हुए भी अधिक नजर आ रही हैं.

समझा जाता है कि CM पुष्कर सिंह धामी उनको उनकी प्रतिष्ठा-ख्याति-सहजता और सरलता पसंद है.उनको CS बना के सेवा विस्तार देने के हक़ में हैं.राधा रतूड़ी का Retirement मार्च-2024 का है.उनको CS बना के Extension दिया भी जाए तो उनके पास अगस्त-2024 तक की ही सेवा रहेगी.उसके बाद फिर आनंदबर्द्धन को पहले उमाकांत फिर मनीषा के VRS के बाद Number-1 नौकरशाह बनने से कोई नहीं रोक सकता है.RR को सिर्फ तभी झटका लग सकता है जब मौजूदा CS डॉ संधू को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर एक और छोटा सा भी Extension ले लें.तब RR ख़ामोशी के साथ सेवा से विदा हो जाएंगी.आगे क्या होता है, ये सभी तकदीर के गर्भ में हैं.राधा को CS बनाना BJP और पुष्कर सरकार के लिए लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अहम रह सकता है.

चुनावी भाषणों में सरकार राज्य को पहली महिला CS देने और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए श्रेय ले सकती है.मुख्यमंत्री पुष्कर को नारी शक्ति को सम्मान देने और महिला अफसरों को प्रमुख ओहदों पर काबिलियत दिखाने के लिए मौक़ा भरपूर देने के लिए जाना जाता है.ये संयोग है कि 23 सालों में भी उत्तराखंड महिला CS नहीं दे पाया.P ज्योति कुमार-विनीता कुमार-अंजलि प्रसाद-राधा सरीखी Senior महिला IAS अफसरों के Cadre में रहने के बावजूद.IPS Cadre ने इस मामले में बाजी मारने में सफलता पाई.कंचन चौधरी भट्टाचार्य जब साल-2004 में DGP बनीं तो वह देश की पहली महिला IPS अफसर थीं जो इस ओहदे पर पहुंची थीं.तब ND तिवारी CM थे.सरकार कांग्रेस की थीं.CS डॉ रघुनन्दन सिंह टोलिया हुआ करते थे और कंचन का नाम मजबूती से DGP के लिए सरकार के सामने पेश करने वाले सुरजीत कुमार दास प्रमुख सचिव (गृह).

विडंबना ये कि ये चारों दुनिया में नहीं हैं.NDT को छोड़ बाकी सभी के लिए ये कहा जा सकता है कि उनको दुनिया से जाने में अभी इतनी जल्दी नहीं करना चाहिए था.सिर्फ NDT ने भरपूर उम्र पाई. वर्तमान हालात पर लौटें.आनंदबर्द्धन को तेज-तर्रार माना जाता है.पुष्कर सिंह धामी पहली बार CM बनें तो उनको CMO का मुखिया बनाया था.PSD-2.0 में हालाँकि उनकी जगह राधा रतूड़ी और R मीनाक्षी सुन्दरम-विनय शंकर पांडे ने ले ली है.त्रिवेन्द्र सिंह रावत के CM रहने के दौर में उनसे एक-एक कर सैनिक कल्याण-आबकारी और गृह सरीखे महकमे हट गए थे तो लोगों को ताज्जुब हुआ था.ये भी बहुत कम और कमजोर आसार थे कि वह सामान्य हालात में CS बनने के लिए शायद ही मौके रखते.

उनके बैच के डॉ राकेश कुमार भले पहले रिटायर हो जाते लेकिन मनीषा और उमाकान्त नौकरी में रहते तो उनका CS तक जल्द पहुँच पाना सहज न हो पाता.आज की तस्वीर दूसरी है.असामान्य हालात न रहे तो राधा के बाद आनंदबर्द्धन इकलौते Eligible और दूर-दूर तक प्रतिस्पर्द्धी रहित CS Contender उत्तराखंड में रह गए हैं.उनकी नौकरी June-2027 तक है.सरकार के साथ समन्वय बिठा के रखने में सफल रहे तो उनके पास बहुत लम्बा वक्फा और बड़ा मौका खुद को शीर्ष नौकरशाह के तौर पर साबित करने के लिए रहेगा.पंवार दंपत्ति के लिए जो पहलू खेदजनक रहा, वह उनके पेशेवर जीवन के लिए वरदान कही जा सकती है.उनके करीब CS की दौड़ में कोई करीब भी नहीं है.

Cadre आवंटन में गलती और लापरवाही कहें या फिर कुछ और कि IPS की तरह IAS बैच में बहुत बड़ी विसंगतियां उत्तराखंड से जुड़ी रहीं.भारत सरकार ने ADGP-25 साल की सेवा को मानक न बनाया होता तो उत्तराखंड के लिए अशोक कुमार के बाद नया DGP तलाशना बहुत मुश्किल होता.IPS Cadre में साल-89 बैच के बाद सीधे साल-1995 बैच उत्तराखंड को आवंटित हुआ.पूरे 6 साल का बैच अंतर.मौजूदा DGP अभिनव कुमार 1996 बैच के हैं.उन्होंने 1995 बैच के दीपम सेठ और PVK प्रसाद पर तरजीह पाई है.IAS बैच आवंटन में 1992 के बाद 1997 बैच है.बीच में 5 बैच गायब हैं.97 बैच में 3 नाम थे.रमेश कुमार सुधांशु और लालरिन रैना फैनई के साथ ही भूपिंदर कौर ओळख.भूपिंदर कौन ने VRS ले लिया और UNO की बड़ी नौकरी से जुड़ गईं.इस अब सुधांशु-फैनई ही CS के लिए आनंदबर्द्धन के बाद वक्त आने पर बचे रह जाएंगे.

ये देखने वाली बात होगी कि आनंदबर्द्धन CS बनते हैं तो कितने साल इस कुर्सी पर रहेंगे.दरअसल,सुधांशु-फैनई CS के लिए 2027 में अर्ह होंगे.तब तक उनको चुनौती देने वाला कोई है ही नहीं.सुधांशु-फैनई को लेकिन एक साल बाद ही चुनौती देने के लिए देहरादून के ही रहने वाले अमित सिंह नेगी होंगे.वह1999 बैच के हैं.उनकी नौकरी साल-2036 तक है.अभी वह भारत सरकार में हैं और बेहद प्रतिभावान नौकरशाहों में शुमार होते हैं.कोरोना काल में स्वास्थ्य सचिव के तौर पर और बतौर वित्त सचिव अमित के कामकाज को याद किया जाता है.

अमित CS बनते हैं और जल्दी नहीं हटते हैं तो कई नौकरशाहों को सदमा दे सकते हैं.ये लेकिन मुमकिन नहीं दिखता है.वह भारत सरकार में सचिव के तौर पर बड़ा अरसा गुजारेंगे, इसके कयास अभी से लगाए जा रहे हैं.काबिलियत के साथ ही उनके पास जल्दी IAS में आने का अतिरिक्त उम्र लाभ है.वह भी राधा-मनीषा की तरह 23 साल में ही सेवा में आ गए थे.  

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